Raag Yaman Ka Parichay
प्रथम प्रहर निशि गाइये, गनि को कर सम्वाद। जाति सम्पूर्ण तीवर मध्यम, यमन आश्रय राग।।
राग यमन परिचय – इस राग की रचना थाट कल्याण से मानी गई है। इसमें तीव्र मध्यम और अन्य स्वर शुद्ध प्रयोग किये जाते हैं। ग वादी और नि सम्वादी माना जाता है। रात्रि के प्रथम प्रहर में इसे गाया-बजाया जाता है। इसके आरोह-अवरोह दोनों में सातो स्वर प्रयोग किये जाते हैं। इसलिये इसकी जाति सम्पूर्ण है।
आरोह – अवरोह:
- आरोह: नी रे सा – नी रे ग मे पा ध नी सां
- अवरोह: सां, नि, ध, प, मे, ग, रे, सा |
- पकड़: नी रे ग रे सा, प मे ग रे सा

राग यमन परिचय
- थाट: कल्याण
- विकृत स्वर : मध्यम (मे) तीव्र
- स्वर: सभी स्वर शुद्ध
- जाति: सम्पूर्ण-संपूर्ण
- वादी स्वर: गंधार (ग)
- संवादी स्वर: निषाद (नि)
- गायन समय: शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक (रात का पहला पहर)
विशेष जानकारी
- इतिहास – राग यमन का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है और यह भारत मुनि के नाट्यशास्त्र में भी वर्णित है।
- कर्नाटक संगीत में समानता – कर्नाटक संगीत में इसे राग कल्याणी के नाम से जाना जाता है।
- उपशास्त्रीय संगीत में प्रयोग – राग यमन को भजन, ग़ज़ल, फिल्मी गीतों और अन्य संगीत शैलियों में भी बड़े प्रभावी रूप से इस्तेमाल किया जाता है।
raag yaman notes
raag yaman bandish – Madhya-Lay ( 8 Matra )
- Sthayi
नि ध प — | — रे — सा | ग रे ग ग | — — प प |
ये ऽ री ऽ | ऽ आ ऽ ली | पि या बि न | ऽ ऽ स खी |
O | 3 | × | 2
ग मे ग प | प ध प प | निध नि प प | रे रे सा सा |
क ल ना प | र त मो हे | घऽ री प ल | छि न दि न |
O | 3 | × | 2
- Antara
प प सां सां | सां ऽ सां सां | सां ऽ नि ध | नि ध प प |
ज ब से पि | या ऽ प र | दे ऽ स ग | व न की न्हो |
O | 3 | × | 2
प गं रें सां | नि ध प प | ध नि ध प | रे रे सा सा |
र ति यां क | ट त मो हे | ता ऽ ऽ रे | गि न गि न |
O | 3 | × | 2
Raag Yaman Taan
स्थायी [ 8 मात्रा ]
- निरे, गरे, निरे, सा~ | पमे, गरे, गरे, सा~
- गमे, पमे, गमे, पमे | गमे, पमे, गरे, सा~
- निरे, गमे, पध, मप, | गमे, पमे, गरे, सा~
- निरे, गमे, धनी, सां~ | सांनि, धप, मेग, रेसा
अंतरा [ 8 मात्रा ]
- गमे, धनि, सांनि, धप, | गमे, धनि, सां~ निसां |
- सांनि, धप, मेप, गमे | ध~ नि~ सांध, निसां |
How To Read Sargam Notes
कोमल स्वर: कोमल (मंद) स्वरों को “(k)” या “( _ )” से दर्शाया जाता है। उदाहरण के लिए:
- कोमल ग: ग(k) या ग
- कोमल रे: रे(k) या रे
- कोमल ध: ध(k) या ध
- कोमल नि: नि(k) या नि
नोट: आप परीक्षाओं में (रे, ग, ध, नि,) को इस प्रकार लिख सकते हैं।
तीव्र स्वर: तीव्र (तीव्र) स्वर को “(t)” या “(मे)” से दर्शाया जाता है। उदाहरण के लिए:
- तीव्र म: म(t) या मे
स्वर को खींचना: गाने के अनुसार स्वर को खींचने के लिए “- ” का उपयोग किया जाता है।
तेज़ स्वर: जैसे “रेग” लिखे हुए स्वर यह दर्शाते हैं कि इन्हें तेज़ी से बजाया जाता है या एक बीट पर दो स्वर बजाए जाते हैं।
मंद्र सप्तक (निम्न सप्तक) स्वर: स्वर के नीचे एक बिंदु (जैसे, “.नि”) मंद्र सप्तक के स्वर को दर्शाता है।
- उदाहरण: .नि = मंद्र सप्तक नि
तार सप्तक (उच्च सप्तक) स्वर: एक रेखा या विशेष संकेत स्वर को तार सप्तक में दर्शाता है।
- उदाहरण: सां = तार सप्तक सा
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